Monday, 9 April 2018

गोसेवा आयोग के दावे फेल : गाय के पेट से ऑपरेशन में निकली 60 किलो पॉलीथिन gau seva dham hospital

राजमार्ग पर होडल में स्थित गोसेवा धाम अस्पताल में ऑपरेशन करने के दौरान एक गाय के पेट से 60 किलोग्राम पॉलीथिन लोहे की कील, पांच रुपये का सिक्का व काफी कचरा निकला। गाय के पेट से इस तरह से पालीथिन व कचरा निकलने की सूचना मिलने के बाद लोगों का उसे देखने के लिए तांता लगा हुआ है। चिकित्सकों द्वारा किए गए उस सफल आपरेशन के बाद गाय पूरी तरह से स्वस्थ है और अब अच्छी तरह से चारा खा रही है।
ऑपरेशन के द्वारा गाय के पेट से निकली इतनी ज्यादा पॉलीथिन ने सरकार के पॉलीथिन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने के दावों को भी फेल करके रख दिया है। वहीं सड़कों पर बेसहारा गायों को संरक्षण देने के गोसेवा आयोग के दावों को भी झुठला दिया है। विश्व विख्यात कथावाचक देवी चित्रलेखा द्वारा संचालित गोसेवा धाम अस्पताल में पलवल के रहने वाले गजेंद्र ने अपनी गाय को अस्पताल में भर्ती करवाया था। उसने डॉक्टरों को बताया कि उनकी गाय पिछले कुछ दिनों से कुछ खा नहीं रही है।

डॉक्टरों ने गाय की जांच की और बाद में हाल ही में लगाई गई आधुनिक एक्स-रे मशीन से गाय के पेट का एक्स-रे किया गया। इसमें गाय के पेट में कुछ कचरा सा दिखाई दिया। इस पर डॉक्टरों ने गाय का ऑपरेशन करने को कहा और ऑपरेशन किया गया। जैसे ही डॉक्टरों ने गाय का ऑपरेशन करने के लिए उसका पेट खोला तो डॉक्टर चकित रह गए। डाक्टरों को गाय के पेट में पालीथिन भरी मिली।

प्रभु का दिया हुआ है जीवन : चित्रलेखाजी

यह जीवन प्रभु का दिया हुआ है। प्रभु की भक्ति में समर्पित कर देना ही जीवन की सार्थकता है। यह शरीर क्या हमारा है। क्या ये आंख-कान हाथ हमारे हैं तो ये हमारे बस में क्यों नहीं रहते। यह मेरा कुछ नहीं है, ना कुछ लेकर आये हैं, ना कुछ लेकर जाएंगे। सिर्फ प्रभु भक्ति ही हमारा है।
किसनपुर-सुरमाहा खेल मैदान में आयोजित भागवत ज्ञान कथा की वाचिका साध्वी देवी चित्रलेखा जी ने अपनी देव वाणी में कही। साध्वी ने भागवत कथा के प्रथम श्लोक की व्याख्या करते हुये सुकदेव जी के जन्म की कथा का श्रवण कराया। कहा कि सुकदेव जी महराज जन्म लेते ही वन की ओर चले गये। उन्हें यह भी पता नहीं था कि स्त्री और पुरूष में क्या भेद होता है। साध्वी ने भगवान के भक्त विदुर एवं विदुरानी के कथा का भी श्रवण कराया। कहा कि ये जीवन मात्र प्रभु का दिया हुआ है। इसे प्रभु भक्ति में लगाना चाहिये। जैसा हम दूसरे से आचरण करेंगे हमारे विचार भी उसी तरह के बन जाएंगे। अत: आप सभी अपने हृदय में सुविचार रखें तथा भगवान की भक्ति में अपने को समर्पित करें। साधवी देवी चित्रलेखा ने कहा कि परमात्मा से जुड़ने के लिये श्रद्धा और विश्वास ही साधन बनता है। इस आयोजन में मुख्य आचार्य पंडित विजय कृष्ण, बलराम जी, धीरज भारद्वाज सहित वृंदावन से आयी समस्त संगीत टीम के साथ-साथ यजमान डॉ. शालिग्राम यादव, पूर्व मुखिया मनोज पासवान, मिथिलेश कुमार मुन्ना, अरूण कुमार यादव सहित स्थानीय युवक आयोजन को सफल बनाने में सराहनीय सेवा देते रहे।

जीव को कर्म के अनुसार भोगने पड़ते हैं फल : देवी चित्रलेखाजी

कोटा | दाधीचगार्डन मे वर्ल्ड संकीर्तन टूर ट्रस्ट और गो सेवा धाम द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन देवी चित्रलेखा ने हजारों श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए कहा कि जीव जन्म लेते ही माया में लिपट जाता है। माया में लिपट जाने के कारण जीव अपने कल्याण के लिए कुछ नहीं कर पाता। वह जैसे-जैसे कर्म करता जाता है। वैसे-वैसे फल उसे भोगने पड़ते हैं। उन्होंने बताया के मृत्यु के बाद जीव को 28 नरकों में से अपने कर्म के अनुसार भोगना पड़ता है उन्होंने कहा की तात्पर्य यह है कि जीव को भगवान नाम के प्रति आस्था रखनी चाहिए। फिर वह नाम चाहे आलस्य में लें या भाव से लें। 

इसके बाद देवी चित्रलेखा ने गुरु और शिष्य के बंधन पर प्रकाश डाला कहा कि सच्चे गुरु और शिष्य के संबंध का उद्देश्य सिर्फ भगवद् प्राप्ति होती है। जो शिष्य अपने सद्गुरु की अंगुली पकड़ कर भक्ति करता है। निश्चित ही वह भगवान को पा लेता है। कथा प्रबंधक धीरज भारद्वाज ने बताया कि देवी चित्रलेखा जी ने कहा कि भागवत कथा प्रभू कृपा से ही संभव है जिसने हरिनाम को पकड़ लिया वो अमर हो गया जैसे भक्त प्रहलाद भक्त मीरा बाई संत तुकाराम कलियुग में केवल कृष्ण नाम के सहारे ही इस भव सागर से पार हुआ जा सकता है। 

उन्होंने कहा कि देश ऊंचे संस्कारोंगे बढ़ सकता है। हमारी शिक्षा प्रणाली को संस्कार से जोडने की आवश्यकता है। उन्होंने वर्तमान मे चल रहे एक वीडियो का भी जिक्र किया जिसके कारण बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि अपने बच्चों को एटीएम मशीन मत बनाइए उन्हें सच्चा इंसान बनाइए बच्चे को उसकी रूचि के अनुसार पढ़ाई कराएं ताकि उसका विकास हो की विनाश। कथा विश्रांति पर भागवत जी की आरती मे पीपल्दा विधायक विधा शंकर नंदवाना सहित एलन के निदेशक गोविंद माहेश्वरी, ललितेश कौशिक, राजेन्द्र खण्डेलवाल, सुरेश दीक्षित, गिरधर बडेरा, आर पी सिंह आदि सम्मिलित हुए 

संकीर्तन टूर ट्रस्ट और गो सेवा धाम द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा। 

Women's day Special: जन और जीव की जिंदगी को रंगों से भर रहीं चित्रलेखाजी

शास्त्रों में एक श्लोक लिखा-यस्य पूज्यंते नार्यस्तु तत्र रमन्ते देवता:। 
मतलब जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। इसी श्लोक को चरितार्थ करते हुए देवी चित्रलेखा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देती आ रही हैं। उन्होंने सात वर्ष की अल्पायु से कन्या भ्रूण हत्या, पर्यावरण संरक्षण, वन्य जीव सुरक्षा को लेकर अभियान चलाया हुआ है।
इतना ही नहीं बीमार व बेसहारा गायों का भी वह सहारा बनी हुई हैं। सात वर्ष की आयु में श्रीमद्भागवत कथा वाचक बनने के साथ शुरू हुए अपने सफर में उन्होंने समाजसेवा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। चित्रलेखा से देवी चित्रलेखा बनीं, इस महिला ने साबित कर दिया कि यदि नारी चाहे तो उसके लिए कोई भी कार्य मुश्किल नहीं है। दूसरों शब्दों में कहें तो वह अपनी सेवा व प्रेम से जन-जीव की जिंदगी के कैनवस को रंगों से भर रही हैं।

होडल खाम्बी  निवासी देवी चित्रलेखा (22) ने 12 वर्ष पहले अपने गुरु बाबा गिरधारी, माता ब्रजलता, पिता टीका राम के सहयोग से लाचार व बीमार गोवंश के लिए काम करना शुरू किया। उनके इस कदम से जिला पलवल ही नहीं, उत्तर प्रदेश के मथुरा, कोसी, अलीगढ़ व आसपास के जिलों तथा फरीदाबाद, गुड़गांव व मेवात जिले में बेसहारा गायों को एक सहारा मिला।

Thursday, 5 April 2018

भगवान श्रीकृष्ण को पाने का सबसे सरल तरीका है गोसेवा: देवी चित्रलेखा ji

कटेरा (झाँसी) कस्बे के झलकारी बाई स्टेडियम में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार को वर्ल्ड संकीर्तन टूर ट्रस्ट एवं गौ सेवा धाम से पधारी कथा व्यास देवी चित्रलेखा जी ने अपने श्री मुख से गोसेवा पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए हमें बुरे कर्मों का संकल्पित भाव से त्याग करना होगा। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गाय की निस्वार्थ सेवा करता है, उस पर हमेशा भगवान की कृपा बरसती है। श्रीकृष्ण को पाने का सबसे सरल तरीका गोसेवा ही है।
कथा व्यास देवी चित्रलेखा जी ने भगवान के बाराह अवतार की कथा का प्रसंग सुनाते हुये कहा कि प्रारम्भ में सृष्टि में जल ही जल था। जिससे सृष्टि का कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा था। क्योंकि पृथ्वी व चारों वेद ब्रह्मा जी से चुराकर हिरण्याक्ष रसातल में ले गया था। भगवान ने बाराह अवतार धारण कर हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी व वेद को वापस लाये। उन्होंने कपिल अवतार की कथा सुनाई। शिव जी के द्वारा दक्ष का यज्ञ विध्वंस किया गया। दक्ष यज्ञ की सम्पूर्ण कथा विस्तार से सुनाई। भक्त ध्रुव की कथा सुन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो गये। जड़ भरत की कथा भी विस्तार से सुनाई। अजामिल का उपाख्यान सुना कर बताया कि साधुओं के कहने से अजामिल ने अपने पुत्र का नाम नारायण रखा। अन्त समय में अपने पुत्र नारायण को आवाज दी। इसी से उसका उद्धार हो गया। कथा व्यास ने अपने मधुर कंठ से संगीत की मधुर स्वर लहरियों पर अनेकों भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को झूमने एवं नृत्य करने को विवश कर दिया। अन्त में आरती के पश्चात प्रसाद वितरण कराया गया।

Sunday, 25 March 2018

जनपद मथुरा के शहर कोसीकला के समीप यमुना नदी के तट पर स्थित गॉव मझोई मै चैत्र माह वसंत नवरात्रो मै आठे व नवमी के दिन मेले का आयोजन सैकड़ो वर्षो से होता आया है।

नवरात्रि मेले पवन अवशर पर हजारो भक्तो ने किये माँ दुर्गा के दर्शन।
नवरात्रि मेले मै  उमड़ा भक्तो का जनसैलाब।
यमुना मै डुबकी लगा देवी के नौ रूप सामान कन्याओ की पूजा कर खोला व्रत।
आदिशक्ति दुर्गा की पूजा, आराधना व साधना  कर भक्तो ने मांगी मुरादे।

 जनपद मथुरा के शहर कोसीकला के समीप यमुना नदी के तट पर  स्थित गॉव मझोई मै चैत्र माह वसंत नवरात्रो मै आठे व नवमी के दिन  मेले का  आयोजन सैकड़ो वर्षो से होता आया है।
आठे व नवमी को  शनिवार और  रविवार का दिन होने  से  श्रद्धालुओं की संख्या मै और ज्यादा इजाफा हो गया
भक्तो  ने  यमुना मै  डुबकी लगा कर माँ दुर्गा के मंदिर मै देवी के नौ रूपों  के दर्शन किये।
 माँ दुर्गा के  के दर्शन के लिए सुबह ४ बजे  से शुरू भक्तो की भीड़ का सिलसिला मध्य रात्रि  तक चलता रहता  है

आठे  की  संध्या पर गॉव मै  अलग-अलग जगह पर भजन कीर्तन व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है
इस आयोजन का समस्त ग्रामवासी व बाहर से आये सभी भक्त जमकर लुत्फ़ उठाते है 
इस मेले मै भारत के अलग-अलग राज्यों से  हजारो  की संख्या मै भक्त पधारते है
काफी  लोग इस पर्व के दौरान व्रत रखते है और  नवमी में नौ कन्याओ को भोग लगाकर साथ मै मंदिर मै देवी माँ के नौ रूपों  के दर्शन कर अपना व्रत खोलते है 

माँ दुर्गा मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी राहुल तिवारी बताते है की बाहर से आये सभी भक्तजनो के ठहरने के लिए समिति के तरफ से निशुल्क धर्मशाला की व्यव्श्था की गयी है जिसमे हजारो भक्त एक साथ रुक सकते है
दर्शन के बाद कोई झूले का आनंद ले रहा है तो जगह-जगह फास्ट फूड और चाट-पकौड़ी की दुकानों पर भीड़ नजर आ रही है। मिट्टी और प्लास्टि के खिलौनों की दुकानें सजी हुई हैं

मंदिर मै छोटे बच्चो के मुंडन का भी बड़ा महत्व बताया जाता है 
व सैकड़ो बच्चो का मुंडन इस मंदिर परिसर मै होता है 

भीड़ को देखते हुए समिति के सभी युवा सदस्य सक्रिय हो जाते है ,  व्यवस्था को बनाये रखने मै मदद करते है 
और बाहर से आ रहे सभी वाहनों को गॉव से २कम  दूर २ मुख्य द्वारो पर ही फ्री पार्किंग की व्यव्श्था की जाती है .
मेले मै स्वछता पर भी जोर दिया जाता है व सभी को जागरूक किया जाता है की मंदिर परिसर के आस पास गंदगी न फैलाये और सम्पर्ण परिसर को स्वच्छ रखने मै समिति की मदद करे

राहुल तिवारी नवत्रात्रि के महत्व को बताते हुए कहते है की लंका पे विजय प्राप्त करने से पहले राम जी ने समुन्दर तट पे नौ दिन इसकी पूजा की और दसवें दिन वो युद्ध के लिए प्रस्थान कर गए थे और विजय प्राप्त कर ली थी
Thanks.
Regards 

     (Rahul Sharma Tiwari)

Saturday, 20 January 2018

देवी चित्रलेखाजी की ये ख़ास बाते नहीं जानते होंगे आप, जानिये उनके जीवन के बारे मै, जानिये देवीजी का जीवन परिचय. Devi Chitralekha Ji | #Deviji #DeviChitralekha | Age, Family, Biography, gau seva dham hospital

कहते हैं भारत महान विभूतियों की जन्मदायी रही है. समाज को भक्ति और ज्ञान की राह दिखाने के लिए कोई आलोकिक शक्ति भक्ति पथ पर या समाज सेवी पथ पर अग्रसर होने अवश्य आता है. ऐसी ही एक दिव्य ज्योति है देवी चित्रलेखा जी. जिस उम्र में बच्चे बोलने मात्र के लिए मां-बाप पर निर्भर रहते हैं उतनी कम उम्र में देवी चित्रलेखा जी ने करीब 200 श्रीमद भागवत कथाओं का सफल आयोजन किया है.कहते हैं भारतकहते हैं भारत महान विभूतियों की जन्मदायी रही है. समाज को भक्ति और ज्ञान की राह दिखाने के लिए कोई आलोकिक शक्ति भक्ति पथ पर या समाज सेवी पथ पर अग्रसर होने अवश्य आता है. ऐसी ही एक दिव्य ज्योति है देवी चित्रलेखा जी. जिस उम्र में बच्चे बोलने मात्र के लिए मां-बाप पर निर्भर रहते हैं उतनी कम उम्र में देवी चित्रलेखा जी ने करीब 200 श्रीमद भागवत कथाओं का सफल आयोजन किया है. महान विभूतियों की जन्मदायी रही है. समाज को भक्ति और ज्ञान की राह दिखाने के लिए कोई आलोकिक शक्ति भक्ति पथ पर या समाज सेवी पथ पर अग्रसर होने अवश्य आता है. ऐसी ही एक दिव्य ज्योति है देवी चित्रलेखा जी. जिस उम्र में बच्चे बोलने मात्र के लिए मां-बाप पर निर्भर रहते हैं उतनी कम उम्र में देवी चित्रलेखा जी ने करीब 200 श्रीमद भागवत कथाओं का सफल आयोजन किया है.



देवी चित्रलेखा जी का जन्म :-

देवी चित्रलेखा जी का जन्म 19 जनवरी , 1997 में ब्राह्मण परिवार में गौरपार्षद भक्त प्रवर पंडित टीकाराम शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती चमेली देवी शर्मा के पवित्र कोख (गर्भ) से भारत में हरियाणा राज्य के पलवल जिले के अन्तर्गत पावन ग्राम खाम्बी में हुआ. उक्त खाम्बी ग्राम (आदिवृन्दावन) ब्रज चौरासी कोस की परिधि में ही आता है. इस कारण देवी जी को ब्रजभूमि के दिव्य संस्कार स्वतः ही प्राप्त हो गये. जन्म के उपरान्त इस आलौकिक बालिका को देखने हेतु अनेक संत, महात्मा , पंडित दम्पति के घर पधारे और भविष्यवाणी की कि यह अल्प व्यस्क चित्रलेखा जी एक दिन देश-विदेश के बड़े-बड़े विद्वानों को चकित कर देंगी.



देवी चित्रलेखा जी को दीक्षा संस्कार :-

देवी चित्रलेखा जी को मात्र चार साल की आयु में एक बंगाली संत श्री श्री गिरधारी बाबा महाराज से दीक्षा संस्कार हो गया. इनके परिवार में इनके माता-पिता, दादा-दादी,नाना-नानी पहले से ही भक्त रहे हैं। जब देवी जी 6 वर्ष की थीं तो एक बार अपने माता-पिता के साथ बरसाने में एक संत श्री रमेश बाबा महाराज के प्रवचन सुनने गई थीं. तो उन बाबा महाराज ने देवी को अपने प्रवचनों के बाद देवी जी के हाथ में माईक देकर कुछ बोलने के लिये खड़ा कर दिया कि “चलो चित्रलेखा कुछ सुनाओ तो उन्होंने हाथ में माईक लेकर करीब आधे घण्टे तक प्रवचन बोले. उस समय सभी वहाँ उपस्थित लोग भावविभोर आश्चर्य एवं चकित हो गये. स्वयं श्री श्री रमेश बाबा महाराज ने भी देवी को आशिर्वाद दिया व काफ़ी प्रशंसा की. उसी दिन से सभी को ऐसा लगा कि चित्रलेखा जी भी प्रवचन कर सकती हैं.




देवी चित्रलेखा जी की प्रथम भागवत सप्ताह :-

उनके गुरुदेव श्री श्री गिरधारी बंगाली बाबा ने प्रथम भागवत सप्ताह विधि-विधान से मथुरा वृन्दावन के समीप तपोवन में (जहां पर कात्यायनी देवी ने भगवान श्री कृष्ण को पति रुप में प्राप्त करने के लिये 60 हजार वर्ष तपस्या की थी) रख दिया. सभी लोग व इनके माता-पिता घबरा रहे थे कि बाबा आप सात दिन की श्रीमद्भागवत सप्ताह मत रखो. एक-दो दिन का ही प्रवचन रख लिजिये. ये बालिका लगातार सात दिन का भागवत सप्ताह नही कर पायेगी परन्तु उनके गुरुजी नही माने दोनों भुजा उठाकर बोले घबराओं मत मेरा आशिर्वाद है कि ये सात दिन का ही श्रीमद्भागवत सप्ताह करेगी क्योकि श्रीराधारानी ने मुझे सपना दिया है कि यहाँ पुष्प वर्षा होगी। गुरुजी का आशिर्वाद हुआ यमुना नदी के किनारे तपोवन भूमि में श्रीमद्भागवत सप्ताह रख दिया गया. जबकि यहाँ पर आस-पास दो-तीन किलोमीटर तक कोई गांव या घर नही थे सभी सोच रहे थे कि यहाँ घोर जंगल में कथा सुनने कौन आयेगा? परन्तु गुरु जी का आशिर्वाद व देवी चित्रलेखा जी की भक्ति के कारण वहाँ जंगल में 10 हजार से भी अधिक श्रोता कथा श्रवण करने के लिये रोजाना आये और वहाँ सभी साधु-संत भी कथा श्रवण करने पहुँचे. और तो और वहाँ पर देवी जी के हाथ मोर व गाय रोटी दाना खाने व चुगने लगे. पशु-पक्षी भी प्रसन्न हो गये.





देवी चित्रलेखा जी की साधारण पब्लिक स्कूल में पढाई :-


देवी चित्रलेखा जी के परिवार में कोई भी सदस्य ऐसा नही है जो कि कथा करता हो, प्रवचन करता हो या गाने बजाने वाला हो. जबकि देवी जी प्रवचन करती हैं, हारमोनियम भी बजाती हैं व भजन संकीर्तन भी गाती हैं. 100 से भी ज्यादा रागों पर देवी जी महामंत्र का संकीर्तन करती हैं. इन्हें कहीं से भी कोई शिक्षा नही दी गयी. देवी चित्रलेखा जी श्रीमद्भागवत कथाओं के साथ-साथ साधारण पब्लिक स्कूल में पढाई की. जबकि उनके गुरुदेव श्री गिरधारी बाबा ने तो ये भी कहा है कि देवी जी को पढ़ाने की भी जरुरत नही है. ये तो पूर्व जन्म से ही पढ़ी हुई हैं. फ़िर भी लोकदृष्टि से देवी जी का स्वयं कहना है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भी पढ़ाई करने सांदीपानी आश्रम में गये थे.




विदेशो मै भी हरिनाम प्रचार कर किया भारत का नाम रौशन

देवी जी भारत के विभिन्न प्रान्तों में श्रीमद्भागवत का प्रचार कर चुकी हैं. जैसे बिहार, हरियाणा , उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, गुजारात, मध्य-प्रदेश, उत्तरांचल, नागालैंड आदि. और अब देवी जी द्वारा भारत के बाहर भी श्रीमद्भागवत का प्रचार एवं हरिनाम संकीर्तन किया जा रहा है. जैसे कनाडा, हॉलैंड, ऑस्ट्रेलिया , जर्मनी , जापान 

 इसके अलावा
अमेरिका के विभिन्न राज्यों में – न्यूयार्क, न्यूजर्सी, वाशिंगटन डीसी, मैरीलैंड ,पैंसिलविनिया, टैक्सास, इण्डियाना, फ्लोरिडा, बॉस्टन, । देवी चित्रलेखा जी का उद्देश्य है कि भगवान श्री राधा-कृष्ण के नाम का देश में तथा दूसरे देशों में प्रचार हो. गुरु आज्ञा से श्री हरिनाम प्रचार करना इनका मुख्य उद्देश्य है.


देवी चित्रलेखा जी द्वारा की गई वर्ल्ड संकीर्तन टूर ट्रस्ट की स्थापना :-

वर्ल्ड संकीर्तन टूर ट्रस्ट की स्थापना 10 मार्च 2008 को पूज्य देवी चित्रलेखा जी द्वारा की गई . वर्ल्ड संकीर्तन टूर ट्रस्ट का मुख्यालय गांव-खम्बी, जिला-पलवल, हरियाणा में है. इसका शाखा कार्यालय गौ सेवा धाम” एनएच 2 गांव के पास भुलवाना गांव, होडल, पलवल (एचआर) है। वर्तमान में 100 से अधिक कर्मचारी ट्रस्ट के विभिन्न विभाग में काम कर रहे हैं। दुनियाभर में 300 से अधिक सदस्य ट्रस्ट के मिशन का समर्थन करते हैं।


देवी चित्रलेखाजी के द्वारा बीमार गौ वंश के लिए निशुलक; चलाया जा रहा है आगरा मण्डल व हरियाणा राज्य का प्रथम वातानुकुलित गौ अस्पताल:-

एक दिन, देवी चित्रलेखाजी (देवजी) ने सड़क के किनारे एक घायल गाय को देखा और पाया कि उसकी स्थिति बहुत गंभीर है. तत्पश्चात, देवजी ने गाय की सेवा में भाग लिया और अपना प्राथमिक उपचार दिया. देवीजी इस घटना के बारे में बहुत चिंतित थीं और परिणामस्वरूप घायल और बीमार गायों को उचित देखभाल और उपचार प्रदान करने का एक विचार आया और “गऊ सेवा मंदिर अस्पताल” अस्त्तिव मे आया.
कटान हेतू ले जाने वाली गायों को जब गौरक्षकों के माध्यम से गौसेवा धाम में लाया जाता है तो इन गौवशं का प्राथमिक उपचार यहँा पूर्ण निष्ठा से होता है। अन्य जीव-जन्तु पकि जैसे मोर, हिरण, लगूंर, कबूतर बकरी, ऊँट आदि की सेवा में भी गौसेवा धाम सदैव तत्पर रहता है। असहाय एवं दुर्घटनाग्रस्त गौवंश हेतू यहाँ आधुनिक एम्बुलैंस, कुशल चिकित्सक एवं कम्पाउन्डर, अत्याधुनिक एक्स-रे मशीन, लगभग 30 से भी अधिक गौसेवक, यू.पी.वी.सी खिड़कियाँ आदि जैसी कई सुविधाऐं हैं। पौष्टिक आहारों में दलिया, हरा चारा, गुड़, तथा आर.ओ का पानी आदि भी बीमार गायों को यहाँ पर प्रदान किया जाता है।






गौसेवा धाम में आ चुकी हैं कई महान हस्तिया:
बाबा रामदेव, पूज्य मोरारी बापू, आचार्य बालकृष्ण, सासंद कृष्णपाल गुर्जर, हरियाणा गौसेवा आयोग के अध्यख श्री भानीराम मंगला, पी.सी गु्रप के चेयरमैन श्री पद्म चंद, महामंडलेश्वर ज्ञानानंद जी, राजेन्द्र दास जी महाराज, कथा वाचक पं0 कृष्णचंद शास्त्री, पूर्व मंत्री शिवचरण शर्मा, हरियाणा सरकार के सचिव दीपक मंगला, पूर्व मंत्री हर्ष कुमार, आस्था चैनल सीईओ श्री प्रमोद जोशी आदि जैसी कई हस्तियाँ अब तक गौसेवा धाम की गौसेवा को सराह चुकी हंै।

यह आधुनिक हाँस्पीटल आसपास के 
गौ पालक व गौरक्षक दलों के लिये भी वरदान है
पालक व गौरक्षक दलों के लिये भी वरदान है। किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर गौपालक व गौरक्षक दल इसी हाँस्पीटल का आश्रय लेते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग 2 पर पलवल जिले की होडल तहसील में स्थित इस दो एकड़ में फैले हुये गौसेवा धाम की पावन परिक्रमा करने हेतू दर्शनार्थी दूर-दराज के क्षेत्रों से भी आते हैं।


          You can Donate For Gau Seva Dham Hospital - http://www.worldsankirtan.org/online-donation.aspx



देवी चित्रलेखाजी का विवाह 23 मई 2017 को गौ सेवा धाम हॉस्पिटल होडल पलवल में सौरभ तिवारी
  (माधव प्रभुजी) के साथ संपन्न हुआ 


Bhajan Album of devi chitralekhaji :-

1 Radhe Radhe bol
2 Brij ki malik radhe rani
3 Padawli
4 Mahamantra
5 Sankirtan
6 Mero man lagyo barshane mai

7 Hari naam Dhan
 






Address of gau seva dham hospital :-


Gau Seva Dham Hospital & Research Center
National Highway 19, Hodal, Palwal, Haryana 121106, India 
contact number - 9991771111 9991772222 9991773333 

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Written by Rahul Sharma Tiwari 
(media coordinator- w.s.t.)

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