Wednesday, 18 April 2018

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गौसेवा धाम मे किया गया विशाल गौ भंडारा*

*गौमहा महोत्सव में रही कृष्ण जन्मोत्सव की धूम*

*अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गौसेवा धाम मे किया गया विशाल गौ भंडारा*

कोसीकलाँ एवं होडल के बार्डर पर स्थित देवी चित्रलेखा जी के सानिध्य में संचालित गौसेवा धाम हाँस्पीटल में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा वाचक पं0 कृष्ण चद्रं शास्त्री जी (ठाकुर जी) ने अक्षय तृतीया एवं बाल कृष्ण लीला का मधुर वर्णन सुनाया। कृष्ण जन्मोत्सव के दौरान टाँफी, गुब्बारे, फल, मिठाईयाँ आदि उपस्थित श्रद्धालुओं को बाँटी गई। साथ ही अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गौमाता के लिये एक विशाल एवं एतिहासिक गौ महा भोज एवं गौ भंडारे का आयोजन भी किया गया। जिसमें गौसेवा धाम की तरफ से आसपास की समस्त गौशालाओं को मीठा दलिया एवं गौसेवा धाम में लगी रोटी मेकर मशीन की सहायता से हजारों ताजी रोटियाँ बनाकर निःशुल्क भेजी गई। गौसेवा धाम के इस सेवाकार्य की आसपास के ग्रामीणों ने प्रंशसा की तथा भविष्य में भी इसी तरह से गौसेवा का कार्य निरन्तर जारी रखने की अभिलाषा की। आयोजन के चतृर्थ दिवस  वृन्दावन से डा0 संजयकृष्ण सलिल जी का विशेष आगमन हुआ। समस्त आयोजन में गौसेवा धाम परिवार की प्रमुख भूमिका रही।

Monday, 9 April 2018

गोसेवा आयोग के दावे फेल : गाय के पेट से ऑपरेशन में निकली 60 किलो पॉलीथिन gau seva dham hospital

राजमार्ग पर होडल में स्थित गोसेवा धाम अस्पताल में ऑपरेशन करने के दौरान एक गाय के पेट से 60 किलोग्राम पॉलीथिन लोहे की कील, पांच रुपये का सिक्का व काफी कचरा निकला। गाय के पेट से इस तरह से पालीथिन व कचरा निकलने की सूचना मिलने के बाद लोगों का उसे देखने के लिए तांता लगा हुआ है। चिकित्सकों द्वारा किए गए उस सफल आपरेशन के बाद गाय पूरी तरह से स्वस्थ है और अब अच्छी तरह से चारा खा रही है।
ऑपरेशन के द्वारा गाय के पेट से निकली इतनी ज्यादा पॉलीथिन ने सरकार के पॉलीथिन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने के दावों को भी फेल करके रख दिया है। वहीं सड़कों पर बेसहारा गायों को संरक्षण देने के गोसेवा आयोग के दावों को भी झुठला दिया है। विश्व विख्यात कथावाचक देवी चित्रलेखा द्वारा संचालित गोसेवा धाम अस्पताल में पलवल के रहने वाले गजेंद्र ने अपनी गाय को अस्पताल में भर्ती करवाया था। उसने डॉक्टरों को बताया कि उनकी गाय पिछले कुछ दिनों से कुछ खा नहीं रही है।

डॉक्टरों ने गाय की जांच की और बाद में हाल ही में लगाई गई आधुनिक एक्स-रे मशीन से गाय के पेट का एक्स-रे किया गया। इसमें गाय के पेट में कुछ कचरा सा दिखाई दिया। इस पर डॉक्टरों ने गाय का ऑपरेशन करने को कहा और ऑपरेशन किया गया। जैसे ही डॉक्टरों ने गाय का ऑपरेशन करने के लिए उसका पेट खोला तो डॉक्टर चकित रह गए। डाक्टरों को गाय के पेट में पालीथिन भरी मिली।

प्रभु का दिया हुआ है जीवन : चित्रलेखाजी

यह जीवन प्रभु का दिया हुआ है। प्रभु की भक्ति में समर्पित कर देना ही जीवन की सार्थकता है। यह शरीर क्या हमारा है। क्या ये आंख-कान हाथ हमारे हैं तो ये हमारे बस में क्यों नहीं रहते। यह मेरा कुछ नहीं है, ना कुछ लेकर आये हैं, ना कुछ लेकर जाएंगे। सिर्फ प्रभु भक्ति ही हमारा है।
किसनपुर-सुरमाहा खेल मैदान में आयोजित भागवत ज्ञान कथा की वाचिका साध्वी देवी चित्रलेखा जी ने अपनी देव वाणी में कही। साध्वी ने भागवत कथा के प्रथम श्लोक की व्याख्या करते हुये सुकदेव जी के जन्म की कथा का श्रवण कराया। कहा कि सुकदेव जी महराज जन्म लेते ही वन की ओर चले गये। उन्हें यह भी पता नहीं था कि स्त्री और पुरूष में क्या भेद होता है। साध्वी ने भगवान के भक्त विदुर एवं विदुरानी के कथा का भी श्रवण कराया। कहा कि ये जीवन मात्र प्रभु का दिया हुआ है। इसे प्रभु भक्ति में लगाना चाहिये। जैसा हम दूसरे से आचरण करेंगे हमारे विचार भी उसी तरह के बन जाएंगे। अत: आप सभी अपने हृदय में सुविचार रखें तथा भगवान की भक्ति में अपने को समर्पित करें। साधवी देवी चित्रलेखा ने कहा कि परमात्मा से जुड़ने के लिये श्रद्धा और विश्वास ही साधन बनता है। इस आयोजन में मुख्य आचार्य पंडित विजय कृष्ण, बलराम जी, धीरज भारद्वाज सहित वृंदावन से आयी समस्त संगीत टीम के साथ-साथ यजमान डॉ. शालिग्राम यादव, पूर्व मुखिया मनोज पासवान, मिथिलेश कुमार मुन्ना, अरूण कुमार यादव सहित स्थानीय युवक आयोजन को सफल बनाने में सराहनीय सेवा देते रहे।

जीव को कर्म के अनुसार भोगने पड़ते हैं फल : देवी चित्रलेखाजी

कोटा | दाधीचगार्डन मे वर्ल्ड संकीर्तन टूर ट्रस्ट और गो सेवा धाम द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन देवी चित्रलेखा ने हजारों श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए कहा कि जीव जन्म लेते ही माया में लिपट जाता है। माया में लिपट जाने के कारण जीव अपने कल्याण के लिए कुछ नहीं कर पाता। वह जैसे-जैसे कर्म करता जाता है। वैसे-वैसे फल उसे भोगने पड़ते हैं। उन्होंने बताया के मृत्यु के बाद जीव को 28 नरकों में से अपने कर्म के अनुसार भोगना पड़ता है उन्होंने कहा की तात्पर्य यह है कि जीव को भगवान नाम के प्रति आस्था रखनी चाहिए। फिर वह नाम चाहे आलस्य में लें या भाव से लें। 

इसके बाद देवी चित्रलेखा ने गुरु और शिष्य के बंधन पर प्रकाश डाला कहा कि सच्चे गुरु और शिष्य के संबंध का उद्देश्य सिर्फ भगवद् प्राप्ति होती है। जो शिष्य अपने सद्गुरु की अंगुली पकड़ कर भक्ति करता है। निश्चित ही वह भगवान को पा लेता है। कथा प्रबंधक धीरज भारद्वाज ने बताया कि देवी चित्रलेखा जी ने कहा कि भागवत कथा प्रभू कृपा से ही संभव है जिसने हरिनाम को पकड़ लिया वो अमर हो गया जैसे भक्त प्रहलाद भक्त मीरा बाई संत तुकाराम कलियुग में केवल कृष्ण नाम के सहारे ही इस भव सागर से पार हुआ जा सकता है। 

उन्होंने कहा कि देश ऊंचे संस्कारोंगे बढ़ सकता है। हमारी शिक्षा प्रणाली को संस्कार से जोडने की आवश्यकता है। उन्होंने वर्तमान मे चल रहे एक वीडियो का भी जिक्र किया जिसके कारण बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि अपने बच्चों को एटीएम मशीन मत बनाइए उन्हें सच्चा इंसान बनाइए बच्चे को उसकी रूचि के अनुसार पढ़ाई कराएं ताकि उसका विकास हो की विनाश। कथा विश्रांति पर भागवत जी की आरती मे पीपल्दा विधायक विधा शंकर नंदवाना सहित एलन के निदेशक गोविंद माहेश्वरी, ललितेश कौशिक, राजेन्द्र खण्डेलवाल, सुरेश दीक्षित, गिरधर बडेरा, आर पी सिंह आदि सम्मिलित हुए 

संकीर्तन टूर ट्रस्ट और गो सेवा धाम द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा।